मंत्रालयों की राजभाषा कार्यान्वयन समितियां

सूचना अधिकार अधिनियम 2005 वीडियो लिस्टिंग आदेश / पत्र / परिपत्र प्रशिक्षु सहभागिता केंद्रीय मंत्रालयों से सहभागिता विभाग से संवाद Public Grievance : External website that opens in a new window
श्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री
श्री किरेन रीजीजू, गृह राज्य मंत्री
प्रशिक्षण
हिंदी में काम करना आसान है
मोहन राकेश (8 जनवरी, 1925 – 3 दिसम्बर, 1972)

हिंदी के बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न नाटयलेखक और उपन्यासकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी, 1925 को हुआ था । वे 'नई कहानी' आंदोलन के प्रमुख स्तंभ हैं । 'मलबे का मालिक' उनकी बहुचर्चित कहानी है। वे कथाकार के अतिरिक्त नाटककार के रूप में भी अत्याधिक प्रसिद्ध हैं । कुछ वर्षों तक उन्होनें हिंदी की पत्रिका 'सारिका' का भी संपादन किया है । 'आषाढ़ का एक दिन'  नाट्य रचना के लिए और  'आधे-अधूरे' के रचनाकार के नाते उन्हें संगीत नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था । 'अंधेरे बंद कमरे' उनका हिंदी का  महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है, जिसका अंग्रेजी व रूसी भाषा में भी अनुवाद हुआ । 3 दिसम्बर, 1972 को उन्होने अंतिम सांस ली । उनकी प्रमुख रचनाएं - आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे (नाटक), अंधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल (उपन्यास), क्वार्टर तथा अन्य कहानियां आदि ।

 

जयशंकर प्रसाद (30 जनवरी, 1890 – 15 जनवंबर, 1937)

छायावाद के प्रमुख संस्थापक कवियों में जयशंकर प्रसाद जी का नाम आता है । उन्होंने कहानियां, उपन्यास, निबंध, गद्य-गीत आदि विविध विधाओं में लिखा है और ऐतिहासिक तथा पौराणिक प्रसंगों को आधुनिक संदर्भ देकर अनेक रचनाएं की हैं । उनके प्रबंध काव्य  'कामायनी' और नाटक  'चंद्रगुप्त' को हिंदी साहित्य में विशेष स्थान प्राप्त है । उनका जन्म 30 जनवरी, 1890 और निधन 15 नवंबर, 1937 को हुआ था। उन्होंने 47 वर्षों के छोटे-से जीवनकाल में कविता, नाटक, उपन्यास, कहानी और आलोचनात्मक निबंध आदि विधाओं में समान रूप से उच्च कोटि की रचनाएं की । आपकी प्रमुख रचनाएं हैं - कामायनी (प्रबंध काव्य), कानन कुसुम, झरना, लहर (कविता संग्रह), ध्रुवस्वामिनी, जनमेजय का नागयज्ञ (नाटक), कंकाल, तितली, इरावती (उपन्यास), आकाशदीप (कहानी संग्रह) ।